सोचा था समय उन यादो को कभी न मिटा पाएगा,
सोचा था वो एक पल ज़िन्दगी भर साथ निभाएगा |
उनकी वापसी की उम्मीद ने एक अधुरा ख्वाब जगाया था,
जान कर भी अनजान बन कर उन सपनो को पास बुलाया था |
ज़िन्दगी फिर मासूमियत में घुल जाएगी,
हर सुबह फिर बिन वजेह चेहरे पे मुस्कान लाएगी |
उनकी ख़ुशी में फिर अपनी ख़ुशी ढूँढेगे हम,
अरसो के बाद फिर वही आँखों से जियेंगे हम |
मगर मिलने पर अजनबियों की तरह मिले हम दो,
जिस पल का इंतज़ार था, उसके ख़त्म होने के राह देख रहे हैं वोह |
न जाने क्यूँ वोह लम्हे इत्ने मामूली से लगे,
एक अजीब सुकून के साथ हम वोह ख्वाब से जगे |
एक सुकून - ज़िन्दगी की भाग दौड़ में फिरसे जुट जाने का,
ख्वाबो का नाम देकर उस सच को फिरसे भुलाने का |
खोक्लेपन का एहसास - हर चीज़ और भी बेजान हो गयी,
सुबह बेवजह इतनी खुश और शाम और भी अनजान हो गयी |
घर तोह वही था, शायद मोहल्ला बदल चूका था,
आँखों से बातें करने वालो का जरिया बदल चूका था |
शीशे के टुकडो में जीस चेहरे को ढून्ढ रहे थे हम,
चेहरा तोह वही था, हमारा नजरिया बदल चूका था |
Easy to trace the tracks of my tears!!!
1 week ago

6 comments:
you are definitely not that good in hindi. from where have you copied this?
@fakeiplplayer: I haven't copied it from anywhere. And it is pretty simple hindi. Btw, I will take your denial as a compliment. :)
superb hero .. abhi tak sirf suna tha pahli baar padh rahi hoo...mohabbat mein log akser shayar ho jate hai. tujhse itni acchi umeed nahi thi :)
@Priyanka: Thanks for the comment. Main shayar nahi re, retire ho chuka hoon :)
Respect bhai...!! v v well composed.!!!!
@ZabbaS: Thanks Zaheer. Glad that you liked it.
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